हर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या चिड़चिड़ा होना मानसिक थकान महसूस होना और किसी पर चिल्लाना जैंसी समस्याएं आपके साथ भी हो रही है तो इसे नजर अंदाज न करें। यह एक साइलेंट किलर हैं, जिसका इलाज बहुत जरूरी हैं। यदि इसका इलाज समय रहते नहीं किया गया तो ये परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर बुरा असर डाल सकता हैं। यह समस्या आम होती जा रही है जिससे डिप्रेशन और शारीरिक स्वास्थ्य का खतरा बढ़ता जा रहा है इसकी वज़ह से चेहरे पर समय से पहले झुरिया आना, शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते है यहां तक की व्यक्ति सुसाइड करने की कोशिश भी कर सकता हैं और दूसरों व्यक्तियों को हानि भी पहुंचाने की कोशिश कर सकता है अतः इस समस्या का समय रहते इलाज करें और अपने जीवन में पॉजिटिव विचार रखें।
गुस्सा और चिड़चिड़ापन का कारण :-
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी: जब हम एक्टिविटी या मूवमेंट नहीं करते तो शरीर में नकारात्मक ऊर्जा इकट्ठी हो जाती है जिससे चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है और यह गुस्सा बनकर बाहर निकलता है।
- पाचन संबंधी समस्याएँ: जब आपके शरीर में गैस,एसिडिटी या कब्ज ज्यादा दिनों तक रहता है तो इससे आपका दिमाग अस्थिर रहता है जिससे गुस्सा या चिड़चिड़ापन बना रहता है।
- भावनात्मक चोटें: नकारात्मक विचार आना, अतीत के बारे में ज्यादा सोच-विचार करना जो आपके साथ अच्छा नहीं हुआ हो या ऐसी भावनाएँ जो आप व्यक्त नहीं कर पाते और मन में ही रखते है इससे आपका चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
- डिजिटल ओवरलोड: ज्यादा मोबाइल का इस्तमाल करना या सोशल मीडिया पर ज्यादा वक़्त बिताना इससे हमारा दिमाग थक जाता है।
- शारीरिक या हार्मोनल कारण: शरीर में थायराइड असंतुलित होने से शरीर में energy काम हो जाती है और मूड डिस्टर्ब रहता है। खासतौर पर महिलाओं में periods, postpartum (delivery के बाद) आदि के कारण हार्मोनल चेंज होता है।
- विटामिन की कमी कारण:– विटामिन B-12 और विटामिन D की कमी से दिमाग सुस्त पड़ने लगता है जिससे थकान, भ्रम, चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ जाता है विटामिन B-12 और विटामिन D नर्वस सिस्टम के लिए बहुत जरूरी हैं।
गुस्सा और चिड़चिड़ापन कैसे करें खत्म?
गहरी साँस लें (Deep Breathing Exercise)
नाक से गहरी सांस लें 5 सेकंड तक, फिर इसे रोकें 5 सेकंड तक, फिर मुंह से छोड़ें 5 सेकंड तक। इस प्रक्रिया को जब भी गुस्सा आए तो तुरंत 5 से 10 बार करें यह आपके ब्रेन को ऑक्सीजन देता है और तनाव कम करता है।
थोड़ा रुकें, फिर प्रतिक्रिया दें
जब भी आपको गुस्सा आये तो तुरंत बोलने या एक्शन लेने के बजाय 5 से 10 मिनट शांत बैठें, सिप-सिप कर के पानी पिएं,थोड़ा वॉक करें या जगह छोड़ दे इससे बात आगे नहीं बढ़ती और सोच समझकर बोलना ही समझदारी है।
ध्यान (Meditation) करें
शांत जग़ह में बैठकर आँखे बंद करें अपनी Breathing पर फोकस करें ये आपकी भावनाओं को संतुलित करता है और दिमाग शांत रखता है।
योग का सहारा लें
बालासन:- तनाव और चिंता को कम करता है ।
उष्ट्रासन:- शरीर और मन दोनों के लिए लाभदायक है।
शवासन:- पूरे शरीर और दिमाग को रिलैक्स करता है।
गोमुखासन:- तनाव और चिंता को कम करता है, मानसिक स्पष्टता और शांति देता है।
सर्वांगासन:- थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करता है, पाचन में सुधार करता है, तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
भ्रामरी प्राणायाम :- चिंता और क्रोध को कम करता है।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम :- मानसिक संतुलन लाता है।
योगासन और प्राणायाम का अभ्यास करते रहें, इससे आपको बहुत लाभ होगा।
खानपान में करें बदलाव
क्या खाएं
हरी सब्जियां: जैसे पालक, मेथी, ब्रोकली, हरी बीन्स और पत्ता गोभी जैसी अन्य हरी सब्जियां भी विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत हैं।
बीज: कद्दू , सूरजमुखी, अलसी बीज, चिया बीज इसमें ओमेगा-3 होता है जिससे आपका मूड बेहतर होता है।
फाइबर युक्त आहार: पाचन बेहतर होता है, जिससे मानसिक स्थिति सुधरती है।
मेवा: बादाम, अखरोट, पिस्ता ये तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
फल: केला, बेरीज ,संतरे विशेष रूप से सहायक होते है ये गुस्से को कम करने में मदद करते हैं।
क्या न खाएं
ज्यादा चीनी का प्रयोग ना करें तथा चाय कॉफी में कैफीन होता है इसके अधिक सेवन से चिंता का स्तर बढ़ जाता है और नींद में बाधा आती है।
मसालेदार और ऑयली खाना शरीर के साथ-साथ मन को भी प्रभावित करता है, इससे चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ता है।
प्रोसेस्ड फूड:- पैकेज्ड चिप्स, बिस्किट और जंक फूड खाने से चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ता है, जंक फूड में मौजूद नुक़सान पहुंचनेवाले तत्व, जैसे कि चीनी, नमक, और अस्वास्थ्यकर वसा, ब्लड शुगर के स्तर को बाधित करता है, जिससे मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन होता हैं।
घरेलू उपाय और आयुर्वेद
अश्वगंधा चूर्ण
तनाव, क्रोध और थकान को कम करता है, इससे अच्छी नींद आती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है, लेकिन डॉक्टर से पूछकर ही लें।
ब्राह्मी और शंखपुष्पी सिरप
ब्राह्मी और शंखपुष्पी सिरप, दोनों ही मस्तिष्क स्वास्थ्य और याददाश्त के लिए फ़ायदे मंद है, ब्राह्मी मुख्य रूप से संज्ञानात्मक कार्य, एकाग्रता और स्मृति में सुधार करने में मदद करती है, जबकि शंखपुष्पी तनाव और चिंता को कम करने, मन को शांत करने और याददाश्त बढ़ाने में सहायक है, ये सभी के लिए लाभकारी हैं।
लेमन बाम टी या कैमोमाइल टी
दोनों ही आराम देने वाली और शांत करने वाली हर्बल चाय हैं, लेकिन उनके फायदे और स्वाद में कुछ अंतर हैं। लेमन बाम टी में नींबू जैसा स्वाद होता है और यह तनाव, चिंता और अनिद्रा के लिए फायदेमंद है। कैमोमाइल टी में हल्का, फूलों जैसा स्वाद होता है और यह भी नींद को बढ़ावा देने में, पाचन में सुधार करने और सूजन को कम करने में मदद करती है। खासकर सोने से पहले पिए इससे गहरी नींद आती है।
अरोमाथैरेपी
अरोमाथेरेपी में इस्तेमाल होने वाले कुछ तेलों में शांत करने वाले गुण होते हैं जो तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं, रात को तकिए पर लैवेंडर ऑयल के कुछ बूंदें डालें इससे नींद में सुधार आएगा और दिमाग शांत रहेगा।
भावनाओं को बाहर निकालना ज़रूरी है:-
रोज़ाना डायरी लिखें जो भी बातें आपको परेशान कर रही है या जो भी आपके साथ पुरे दिन में घटित हुआ है उसे डायरी में लिखें इससे आपका मूड अच्छा रहेगा।
खुद से बात करें: क्या ये बात इतनी बड़ी है कि मैं अपनी शांति खो दूं? शांत और सकारात्मक तरीके से खुद से बात करने से तनाव और चिंता कम होता है।
माफ करना सीखें: दूसरों की गलती को पकड़ कर रखना खुद के मन को चोट पहुँचाना होता इससे हमेशा बचे।
डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं:-
मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाये जरूरत पड़ने पर इस्तमाल करें, सोने से 2 घंटे पहले मोबाइल का प्रयोग ना करें इससे नींद में बाधा आती है।
नींद जरुरी है:-
7-8 घंटे की नींद ज़रूरी है। सोने से पहले मधुर संगीत सुनें या कोई पॉजिटिव किताब पढ़ें। सोने का एक निश्चित समय तय करें इससे जल्दी नींद आती है और उसमें नियमितता रखें।
वॉक और प्रकृति से जुड़ें:-
सुबह या शाम 20-30 मिनट वॉक करें इससे आपका मूड बेहतर होगा।
प्रकृति पेड़ पौधों के बीच चलना मानसिक थकावट को कम करता है।
- सूरज की रोशनी से सेरोटोनिन नामक ‘हैप्पी हार्मोन’ बनता है।
निष्कर्ष:-
गुस्सा और चिड़चिड़ापन लोगों के जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है । लेकिन इसके पीछे जो कारण हैं, उसे समझ ले और रोज की जिंदगी में थोड़ा सा बदलाव करे तो हम इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं जिससे हमारा मन शांत और स्थिर हो सकता हैं ।
याद रखिए:-
आप अपने गुस्से का कारण समझे और अपने आप को समय दे शांत मन से अपने अंदर झांकिए और अपनी भावनाओं को पेपर पर लिखिए इससे आपके मन में दबा हुआ गुस्सा बाहर निकलेगा और साथ ही स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं।

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