क्या आपने कभी सड़क पर किसी कुत्ते को पागल की तरह भागते, भौंकते या अचानक किसी राहगीर पर झपटते देखा है? या फिर अख़बार में पढ़ा है कि किसी बच्चे की मौत कुत्ते के काटने के बाद हुई?
रेबीज़ (Rabies) कोई नई बीमारी नहीं है। बल्कि यह इंसान और जानवर, दोनों के लिए घातक है। लेकिन दुख की बात यह है कि आज के आधुनिक ज़माने में भी लोग इसको गंभीरता से नहीं लेते और नज़रअंदाज़ कर देते हैं। शायद इसलिए कि लक्षण आने में समय लगता है, या फिर इस गलतफहमी में कि हमारे इलाके में तो ऐसा कुछ नहीं होता। सच्चाई ये है कि भारत में रेबीज़ से होने वाली मौतों में दुनिया के टॉप देशों में आता है। हर साल हज़ारों लोग सिर्फ़ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि काटने के बाद उन्होंने सही समय पर वैक्सीन नहीं लगवाई, या फिर मामूली खरोंच को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि एक बार रेबीज़ के लक्षण शुरू हो गए, तो लगभग 100% मामलों में मौत हो जाती है। हाँ, आपने सही पढ़ा लगभग 100%। मेडिकल साइंस की इतनी तरक्की के बावजूद, इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। लेकिन यही वह जगह है जहाँ एक उम्मीद की किरण है।इसे 100% रोका जा सकता है, अगर हम सही समय पर सही कदम उठाएँ।
रेबीज़ (Rabies) को समझना सिर्फ़ मेडिकल प्रोफेशनल या एनिमल डॉक्टर का काम नहीं है। ये हर इंसान की ज़िम्मेदारी है, क्योंकि हम में से कोई भी चाहे वो बच्चा हो, वयस्क या बुज़ुर्ग इस खतरे का शिकार हो सकते है। समाज के स्तर पर इसे खत्म करने के लिए हमें क्या करना चाहिए, चलिए इस लेख में हम जानते है।
रेबीज़ क्या है? what is Rabies?
रेबीज़ एक बीमारी है, जो रेबीज़ वायरस के कारण होती है। यह वायरस मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। एक बार शरीर में प्रवेश करने के बाद यह धीरे-धीरे नसों के ज़रिये दिमाग तक पहुँचता है, जहाँ यह सूजन और गंभीर क्षति पैदा करता है। यह बीमारी इंसानों और कई प्रकार के जानवरों को प्रभावित कर सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वायरस हज़ारों सालों से मौजूद है, लेकिन आज भी यह दुनिया के कई हिस्सों, खासकर विकासशील देशों, में एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा है।
रेबीज़ कैसे फैलता है? How does rabies spread?
रेबीज़ का संक्रमण ज़्यादातर संक्रमित जानवर के काटने से होता है।
संक्रमित जानवर की लार के ज़रिए वायरस सीधे रक्त में प्रवेश करता है।
अगर जानवर के नाखून पर लार लगी है और वह खरोंच दे, तो भी संक्रमण हो सकता है। कभी-कभी लार आँख, मुँह या खुले ज़ख्म में जाने से भी खतरा होता है।
भारत में सबसे बड़े संख्या में केस आये है लगभग आवारा कुत्तों का काटना (70–80% मामलों में) या किसी भी जानवर के काटने से हो सकता है, जैसे बिल्ली, बंदर, नेवला, चमगादड़, चूहा अन्य जंगली जानवरों से हो सकता है।
रेबीज़ का लक्षण कब दिखता हैं? When do the symptoms of rabies appear?
रेबीज़ के लक्षण तुरंत नहीं आते। आमतौर पर 1–3 महीने का होता है, लेकिन यह 7 दिन से लेकर 1 साल तक भी हो सकता है।
शुरुआती लक्षण- काटे गए स्थान पर दर्द, जलन या खुजली। हल्का बुखार, थकान, सिरदर्द, बेचैनी, नींद न आना
रेबीज़ का गंभीर लक्षण- पानी पीने में डर (Hydrophobia), हवा लगने पर डर (Aerophobia), निगलने में कठिनाई, मांसपेशियों में ऐंठन, भ्रम, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, लकवा और अंत में कोमा भी हो सकता है। एक बार यह गंभीर लक्षण शुरू हो जाएँ, तो 99% मामलों में मरीज की मौत हो जाती है।
भारत में रेबीज़ की स्थिति - The situation of rabies in India
WHO के आंकड़ों के अनुसार, हर साल दुनिया में लगभग 59,000 लोग रेबीज़ से मरते हैं, जिनमें से करीब 36% मामले भारत में होते हैं। चौंकाने वाली बात यह है की भारत में हर 15 मिनट में एक व्यक्ति रेबीज़ से मरता है और 40% पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बीमारी ज्यादा फैलती है, क्योंकि वहाँ वैक्सीन और जागरूकता की कमी होती है।
बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है - Prevention is the best cure
रेबीज़ की कोई पक्की दवा नहीं है, लेकिन इसे रोकना पूरी तरह संभव है।
बचाव के प्रमुख तरीके: पालतू जानवरों को टीका लगवाएँ, हर साल रेबीज़ का बूस्टर डोज़ ज़रूर लगाएँ। आवारा जानवरों से दूरी बनाएँ, खासकर बच्चों को सिखाएँ कि अनजान कुत्तों या बिल्लियों को छेड़ना खतरनाक हो सकता है। काटने के बाद तुरंत कार्रवाई करें ज़ख्म को 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएँ। Dettol का प्रयोग करें। 24 घंटे से पहले डॉक्टर के पास जाएँ और रेबीज़ वैक्सीन लगवाएँ। समय पर और पूरा टीका का कोर्स लें और बीच में टीका छोड़ना जानलेवा हो सकता है।
रेबीज़ वैक्सीन से जुड़ी गलतफहमियाँ - Misconceptions about the rabies vaccine
गलत धारणा: अगर काटने के बाद खून नहीं निकला तो टीका ज़रूरी नहीं है। पालतू कुत्ता है, तो टीके की जरूरत नहीं। पालतू जानवर भी संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए काटने के बाद वैक्सीन ज़रूरी है। हल्की खरोंच या लार का संपर्क भी खतरनाक है। पुराने इलाज जैसे हल्दी, मिर्च या तेल लगाना ठीक है। यह बेकार और समय बर्बाद करने वाला तरीका है, ये तरीका काम नहीं करता इन सब से बचें।
सामूहिक स्तर पर रोकथाम - Prevention at the community level
रेबीज़ (Rabies) सिर्फ व्यक्तिगत सावधानी से खत्म नहीं होगा, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना जरूरी है। आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम, गाँव-गाँव में जागरूकता अभियान, स्कूलों में बच्चों को बचाव के तरीके सिखाना, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन की मुफ्त उपलब्धता करना।
FAQs
1. रेबीज कैसे फैलता है?
रेबीज आमतौर पर संक्रमित जानवर (जैसे कुत्ता, बिल्ली, बंदर) के काटने या खरोंच से फैलता है। संक्रमित जानवर की लार अगर खुले घाव या त्वचा पर लग जाए तो भी संक्रमण हो सकता है। इसलिए किसी भी जानवर के काटने को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
2. रेबीज के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और काटे गए स्थान पर जलन या झनझनाहट महसूस हो सकती है।
बाद में घबराहट, पानी से डर (Hydrophobia) और सांस लेने में दिक्कत जैसे गंभीर लक्षण दिख सकते हैं।
लक्षण दिखने के बाद यह बीमारी बहुत खतरनाक हो जाती है।
3. जानवर के काटने के बाद तुरंत क्या करें?
सबसे पहले घाव को 10–15 मिनट तक साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। इसके बाद तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाएं। समय पर इलाज ही रेबीज से बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका है।
निष्कर्ष
रेबीज़ (rabies) को अक्सर लोग एक तुच्छ या दूर की बीमारी समझते है और इसे हल्के में ले लेते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि यह हमारे चारों तरफ मौजूद है और किसी भी पल हमला कर सकती है। यह बीमारी किसी के साथ भेदभाव नहीं करती अमीर, गरीब, शहर, गाँव, पढ़ा-लिखा या अनपढ़, कोई भी इसका शिकार हो सकता है। सबसे अहम बात याद रखने की है कि रेबीज़ एक बार शुरू हो जाए, तो इसे रोकना लगभग असंभव है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि यह बीमारी 100% रोकी जा सकता है, अगर हम तीन चीज़ों का ध्यान रखें: जानकारी – हमें पता हो कि यह बीमारी कैसे फैलती है और कब खतरा है। तुरंत कार्रवाई – जानवर के काटने या खरोंचने पर एक मिनट भी बर्बाद न करें; तुरंत ज़ख्म धोएँ और डॉक्टर से मिलें। सावधानी – पालतू जानवरों को समय पर वैक्सीन लगवाएँ, आवारा जानवरों से दूरी बनाएँ और बच्चों को भी ये बातें सिखाएँ।
याद रखें, रेबीज़ पर काबू पाने का मतलब है अनगिनत ज़िंदगियाँ बचाना। अगर हर इंसान अपने घर और मोहल्ले में जागरूक हो जाए, तो हम मिलकर इस बीमारी को भारत से हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं। इसलिए, अगली बार अगर आपको या आपके किसी जानने वाले को कोई जानवर काटे या खरोंच दे, तो यह मत सोचिए कि कुछ नहीं होगा। यह सोच बहुत महंगी पड़ सकती है — यहाँ तक कि ज़िंदगी तक चली जाती है। जबकि सोच यह होनी चाहिए कि अभी इलाज, अभी सावधानी ताकि बाद में पछताना न हो हम सबकी थोड़ी सी समझदारी, समय पर लिया गया टीका, और दूसरों को दी गई सही जानकारी ये तीन हथि है।
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि किसी जानवर के काटने, खरोंच या रेबीज के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। समय पर चिकित्सा सहायता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। लेखक या प्रकाशक इस जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।


Article explains very well on rabies.
Thank you far sharing nice 👍
Rabies ka awareness jaruri hai.
Hi good morning dear blogger.This article, currently trending in Delhi, is a must-read for those so-called intellectuals who seem to find rabies in every street dog. A meaningful reminder for them — #SupportStreetDogs#
Thankyou for sharing this 👍
Rabies is very dangerous, thanks for sharing
If everyone reads and share this kind of information, we can save many lives excellent article.
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I got bitten by a monkey few months ago and I don’t had any info about rabies and I thought let it be, then someone suggested me to visit hospital and take vaccine. That day I learnt how dangerous decease is it. Your blog is too good. Keep guiding people who aren’t aware of these kind of decease n all.
Your topic on health is really meaningful. I agree that health is the greatest wealth, because without it we cannot enjoy life properly. I liked how you reminded us about simple habits like eating healthy, exercising, and sleeping well. Your writing inspired me to take my own health more seriously. Great job! ☺️
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