योग के अद्भुत लाभ: बच्चों, महिलाओं और वृद्धों के लिए सम्पूर्ण गाइड (2025)

स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम

योग के अद्भुत लाभ-आज जिस तरह से हमारे जीवन शैली में रोग बढ़ते जा रहे है, योग की आवश्यकता उतनी ही बढ़ती जा रही है।
योग सभी प्रकार के कष्टों का निवारण करने में सक्षम हैं।
आज मनुष्य अशांत है, दुःखी हैं एवं शारीरिक-मानसिक विकारों से ग्रस्त है।

कहा भी गया है-
“अशांतस्थ कुतः सुखम्” – अशांत व्यक्तियों को सुख कहाँ से मिलेगा ?
शांति के लिए लोग विभिन्न स्थानों से दवाएं पीने हेतु योग, आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि का पालन छोड़ तर्कों में लग जाते हैं। 

समग्र स्वास्थ्य के लिए योग युक्त जीवन पद्धति का समर्पण आवश्यक है।
योग युक्त जीवन पद्धति में अपनी दिनचर्या, भावनाएं, विचार, शारीरिक चेष्टाएं, आहार-विहार, व्यवहार और ज्ञान सब शामिल होते हैं।
आजकल योग के नाम पर जो प्रचार चल रहा है, उसमें लोग केवल शारीरिक व्यायाम तक ही योग को सीमित मान लेते हैं। स्वस्थ एवं सुखद जीवन को स्वस्थ और सुखी बनाने की प्रक्रिया उतनी ही सहज होती है, जितनी दृढ़ इच्छा-शक्ति चाहिए।  


युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा।।

गीता में योगयुक्त सुखी जीवन के लिए कहा गया हैं


अर्थात-योग युक्त आहार (शरीर के पोषण हेतु लिये जाने वाले अन्न, जल, वायु)।

विहार (शरीर के लिए आवश्यक प्रकृति का सान्निध्य), 
चेष्टा (संकल्प पूर्वक मनुष्यता द्वारा किया जाने वाला कर्म-प्रवृत्ति), 
कर्म (कुशलतापूर्वक किया जाने वाला क्रिया-कलाप), 
स्वप्न (विश्राम, सोना आदि), जागरण (लोकों अथवा में आना)-इनका संयम जीवन में आने वाले दुःखों का नाश कर सकता है। 

योगासन करना ही योग है” – यह अधूरा सत्य है।


योग आसन की जब भी बात आती है, तो लोग सीधे योगआसन पर पहुँच जाते हैं।
महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग के क्रम में (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि) इसमें आसन को तीसरे क्रम में रखा गया है।

यदि यम नियम का नियमित पालन भी नहीं किया जाये, तो प्राणायाम का लाभ ठीक-ठीक नहीं मिल पाता। 

यम के अन्तर्गत सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (संग्रह न करना)
और नियम के अन्तर्गत शौच (स्वच्छता), तप, स्वाध्याय, संतोष और ईश्वरप्रणिधान आते हैं।

इन नियमों का उल्लंघन करने से स्वस्थ और सुखी जीवन में अनेक बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
सतत् आहार-विहार, चिंतन-चर्या के प्रति भी जागरूक रहना आवश्यक है।

योग क्यों आवश्यक है?

आजकल लगभग सम्पन्न व्यक्ति जिन्हें पोषक आहार के साथ जीवन की तमाम सुविधाएँ उपलब्ध हैं,
वे भी तमाम शारीरिक रोगों से पीड़ित रहते हैं।
शरीर एक मशीन की तरह है, जैसे मशीन तरह-तरह की क्रियाएँ चलाती रहती हैं,
शरीर में जहाँ उपयोगी तत्व बनते रहते हैं, वहीं विकार भी पैदा होते हैं, जिनको समय पर शरीर से बाहर निकालना आवश्यक होता है।

भी वृत्त फूट भी होती रहती हैं, जिसकी मरम्मत करनी होती हैं।
तभी मन: संयम का निर्माण होता रहता है, जिसके लिए उपयुक्त व्यवस्था बनानी पड़ती है।
इन सबके लिए नियमित, संतुलित, योग्यासन बहुत ही अनुकूल सिद्ध होते हैं। 
शरीर के विकार बाहर करें और शरीर के अंगों को विकसित करें,
उनका स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए नियमित योगासन अभ्यास आवश्यक हो जाता है। 

योग- अभ्यास की प्रक्रिया


आधुनिक युग में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य को ही पूर्ण स्वास्थ्य मानता है।
इस तरह देखा जाये तो कोई भी व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ नहीं है, परंतु इसे और प्रयास किया जा सकता है। 
योग अभ्यास की शुद्ध सिद्ध हुई प्रक्रिया यदि नियमित रूप से किया जाये, तो इस ओर सफलता पाई जा सकती है।

योग अभ्यास को तीन वर्गा में विभाजित किया गया हैं


बढ़ते बच्चों की चंचलता के कारण उन्हें अधिक ऊर्जा अर्जित होती है।
उस ऊर्जा का सही दिशा की ओर लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उनकी सही दिनचर्या एवं तनाव या उलझन लेने की प्रवृत्ति बदलनी जा सकती है।
पाठ भूलने और शारीरिक थकान न होने की समझ हो। योग के नियमित अभ्यास बच्चों की इन सभी समस्याओं को दूर कर सकता है।

किशोरों के अंदर हो रही तेजी से शारीरिक एवं मानसिक बदलाव, चिंता,
स्वंय महत्वता में असामान्य बदलाव या बाहर बढ़ते रह रहे हार्मोन्स का प्रभाव — इनके लिए भी उचित योगाभ्यास सिद्ध होता है। 

योगासन:

ताड़ासन
भुजंगासन
कटीचक्रासन
तिर्यक
हस्थपादासन
शवासन 


(2) महिलाओं के लिए योगाभ्यास –
एक स्वस्थ नारी ही स्वस्थ व्यक्ति स्वस्थ परिवार एवं सभ्य समाज के निर्माण की भूमिका अदा कर सकती है।
इसलिए योगाभ्यास के माध्यम से महिलाएँ शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत कर सकती हैं। 

योगाभ्यास:

संधि संचालन
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी)
शवासन 
उत्तानपादासन 
विपरीतकरणी आसन


(3) वृद्धों के लिए योगाभ्यास – आज आधुनिक समाज में, बुर्जुगो की उपेक्षा की जा रही हैं जिससे वे मानसिक रूप से दुर्बल होते जा रहे हैं।
ऐसे में योग उनके सोचने, समझने और संभावी संतोषी बनाने में मदद कर सकती हैं।
साथ ही कमजोर हो रहे अंग और जोड़ो को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। 

योगाभ्यास:

संधि संचालन
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी)
वक्रासन 
शशांकासन 
वज्रासन 

निष्कर्ष

नियमित रूप से ज्ञात व सही तकनीक का अभ्यास भारहीन एवं स्वाध्यायस्वरूप होना चाहिए।
रोगी स्तिथि से पहले सामान्य प्राणायाम व योगासन श्रेष्ठ उपचार का रूप बनाएं।

10 thoughts on “योग के अद्भुत लाभ: बच्चों, महिलाओं और वृद्धों के लिए सम्पूर्ण गाइड (2025)”

  1. Rakesh ranjan

    आपके विचार और जान से जीवन मे बहुत बदलाव आएगा

  2. मिथिलेश कुमार पाण्डेय

    आपके योग पे दिए गए ज्ञान को जीवन में लाने से बहुत लाभ हो रहा है। कोटि कोटि धन्यवाद

  3. Dear Blogger Your dedication to yoga is truly inspiring! The energy, balance, and focus you radiate through every move is just wow. Keep shining and motivating us..good Job

  4. I read your blogs and I knew that yoga is very important our mental and health fitness which make help positive thoughts.Thank you for sharing your experience.

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